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छोटे से गांव की दीपिका की सफलता का बड़ा राज : मोबाइल से दूरी और किताबों से दोस्ती

इंजीनियर बनकर माता-पिता का नाम रोशन करना चाहती है दीपिका

Satyakhabarindia

 

सत्य खबर हरियाणा

Success Story : हर सफलता के पीछे कोई कहानी होती है और उसके पीछे बहुत कुछ छिपा होता है। आज जब हर बच्चा मोबाइल की दुनिया में को रहा है वही हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के 10वीं के परिणाम में स्टेट टॉप करने वाली भिवानी के आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की छात्रा दीपिका का कहना है कि मोबाइल से दूरी और किताबों से दोस्ती ही उसकी सफलता का सबसे बड़ा राज है।

दीपिका ने 500 में से 499 अंक हासिल किए हैं। पिछले साल स्टेट टॉपर चार छात्र थे जिनके 497 अंक थे। इस बार दीपिका ने दो अंक अधिक लिए हैं और वह अकेली स्टेट टॉपर है। कमल की बात यह है कि दीपिका के पिता इस स्कूल में लिपिक के पद पर कार्यरत है जिसमें दीपिका पढ़ रही थी।

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दीपिका के पिता राजकुमार का कहना है कि दीपिका ने सेल्फ स्टडी से स्टेट टॉप किया है। दीपिका स्कूल से आने के बाद घर पर ही पढ़ाई करती थी। राजकुमार खुद दीपिका के स्कूल में क्लर्क पद पर कार्यरत है। दीपिका तीन बहनों में सबसे बड़ी है। दीपिका के चार सब्जेक्ट में 499 नंबर आए हैं, केवल एक सब्जेक्ट में उनके 99 नंबर आए।

भिवानी के सिवानी खंड के गांव खेड़ा निवासी दीपिका ने 499 अंक हासिल कर तहलका मचा दिया है। दीपिका की बड़ी बहन ने भी 97 फीसदी अंकों के साथ दसवीं में सफलता पाई है। दरअसल तोशाम क्षेत्र के गांव मिरान स्थित आदर्श सीनियर सेकेंडरी स्कूल में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली दीपिका चार बहनों में दूसरे नंबर पर है। दीपिका की बड़ी बहन रीतिका ने भी उसी के साथ दसवीं की परीक्षा दी थी। इसी विद्यालय में दीपिका की दो और छोटी बहनें नीतिका नौंवी और चित्रा तीसरी कक्षा में पढ़ाई कर रही हैं।

दीपिका के पिता राजकुमार का कहना है कि वह बतौर इसी विद्यालय में क्लर्क हैं। हर रोज सुबह स्कूल बस खुद चलाकर चारों बेटियों के अलावा अन्य बच्चों को भी विद्यालय लाता हूं। इसके बाद अपना काम करता हूं। बेटी शुरूआत से ही पढ़ाई में होशियार रही है। स्कूल और घर दोनों ही जगह उसने पढ़ाई पर फोक्स रखा है, जबकि मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी है। पढ़ाई के दौरान उसने कोई ट्यूशन या एक्सट्रा क्लास भी नहीं ली। विषय की कठिनाईयों को अध्यापकों के साथ बेहतर तालमेल बैठाकर सुलझाया। स्कूल से घर आने के बाद मां का भी घरेलू कार्याें में हाथ बंटाती है।

सफलता के टिप्स

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कड़ी मेहनत करने वालों को निश्चित रूप से सफलता मिलती है।
अनुशासन में रहकर पढ़ाई के प्रति पूरी तरह समर्पित
जितना हो सके मोबाइल फोन से दूरी बनाए रखें और किताबों को दोस्त समझें
योजना बनाकर रोजाना पांच से छह घंटे नियमित पढ़ाई करें
जीवन में अनुशासन बनाए रखना आवश्यक है।

लक्ष्य

इंजीनियर बनकर परिवार का नाम रोशन करना
मेरी सफलता का श्रेय मेरे परिवार को जाता है। गुरुजनों ने भी मुझे अच्छे से पढ़ाया और हर विषय की बारीकियों को समझाया, जिसकी बदौलत मुझे ये सफलता मिली है। मैं आगे चलकर इंजीनियर बनना चाहती हूं। इंजीनियर के रूप में मैं अपने माता पिता का नाम रोशन करना चाहती हूं। इसके लिए मैं अभी से तैयारी कर रही हूं।

 

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